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झुंझुनू के लाल जगदीप धनखड़ बने भारत के 14वें उपराष्ट्रपति

खबर झुंझुनू जिले के किठाना गांव से है जगदीप धनखड़ देश के 14वें उपराष्ट्रपति बने। और कल शनिवार शाम 5 बजे वोटिंग के बाद परिणाम घोषित हुआ जिसमें माननीय जगदीप धनखड़ ने  528 वोट से जीत दर्ज़ की। काउंटिंग में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) की ओर से  कैंडिडेट जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले, जबकि उनके विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 182 वोट मिले। साथ में ही 15 वोट निरस्त कर दिए गए। कोटिंग के रिजल्ट के बाद  जगदीप धनखड़ को 528 वोट, जबकि विपक्ष की उम्मीदवार अल्वा को 182 वोट मिले।

आप लोगों ने यह  कहावत तो सुनी होगी कि पूत के पग,पालने में दिख जाते हैं। शायद जगदीप धनखड़ के बारे भी में उनके मां-बाप ने भी यही सोचा होगा।  जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव किसान के घर में हुआ था। जगदीश धनखड़ जी ने किठाना में ही अपनी पढ़ाई की और पांचवी कक्षा तक पढ़ने उसके बाद वह गर्धाना के गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में पढ़ने के लिए चले गए। उस समय स्कूल बस की सुविधाएं नहीं होती थी, जिसकी वजह से वह  रोजाना 4-5 किलोमीटर पैदल चलकर के स्कूल जाते थे।

जगदीप धनखड़ जी शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थे, जिसके वजह से चित्तौड़गढ़ के सैनिक सैनिक स्कूल में उनको दाखिला मिल गया मेरिट के आधार पर उनका और साथ में ही उनके भाई का दाखिला हुआ था। जगदीप जी के करियर के बारे में बताएं तो उन्होंने IIT ,NDA तथा IAS लेवल  के एग्जाम सभी एक्जाम पास किए हुए हैं। वें NDA मैं जाना चाहते थे पर उनकी आंखों की रोशनी कमजोर होने के कारण वह NDA मैं नहीं जा सके ।लेकिन उन्होंने इसके बाद सब कुछ छोड़ कर  अपना भविष्य वकालत में चुना। मात्र 35 वर्ष की उम्र में  वह राजस्थान हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के रूप में चुने गए।

 जगदीप धनखड़ जी साल 1989 से 1991 तक वह झुंझुनू जिले के लोकसभा सांसद  भी रहे। और  प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल के दौरान वह केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं और भारत सरकार में अपनी सेवा दी। एक बार जगदीप धनखड़ जी लोकसभा का चुनाव हार गए। उसके बाद  2003 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोड़ भाजपा में जाने का मन बनाया और भाजपा से चुनाव जीतकर राजस्थान की विधानसभा में पहुंच गए।


अब तक कुछ लोगों के लिए सिर्फ जगदीप धनखड़ ही थे या फिर कुछ  लोगों के लिए केंद्रीय मंत्री जगदीप धनखड़। पर लेकिन 30 जुलाई 2019 को जगदीप जी धनखड़ को मोदी सरकार के द्वारा पश्चिम बंगाल के माननीय राज्यपाल बना दिया गया। और वे अब लोगो मैं पश्चिम  बंगाल के माननीय राज्यपाल के रूप में जाने जाने लगे। वें 30 जुलाई 2019 को पश्चिम बंगाल राज्य के 28वे राज्यपाल बने थे। जगदीप धनखड़ सियासत के बहुत ही अच्छे खिलाड़ी  माने जाते हैं। और जब जब राजस्थान में जाट आरक्षण की हवा तेज हुई तो उन्होंने आगे आकर जाट आरक्षण का भी सपोर्ट किया था।

जानकार तो ये भी बताते हैं कि जगदीप जी धनखड़ सियासत के खेल के अच्छे खिलाड़ी  है। और जब वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल  चुने गए ,तब से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ उनके विरोध मैं उनके सामने डटकर खड़े रहते थे ।

जगदीप जी धनखड़ की कहानी यही बताती है कि जीवन में जो भी करो पूरे मन के साथ करो एक ना एक दिन मंजिल जरूर मिलती है।




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